सैलाना। भगवान राम जहां मर्यादा के प्रतीक है वही कृष्ण जीवन मे व्यावहारिकता के ज्वलंत उदाहरण है, आज से सैकड़ो वर्ष पूर्व द्वारका युग में शिक्षा के लिए माता पिता को छोड़ कर अपने भाई बलराम के साथ सैकड़ो मील दूर गुरु सांदीपनि के आश्रम मे उज्जैन आये।
शिक्षा के लिए जो समर्पण कृष्ण के पालको ने किया यही त्याग और समर्पण बच्चों की उत्तम शिक्षा के लिए हर पालक से अपेक्षित होता है, यह विचार प्राचार्य श्री सारस्वत ने जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर आयोजित शिक्षक पालक बैठक में आए पालको से चर्चा करते हुए व्यक्त किये।

द्वितीय यूनिट टेस्ट के बाद आयोजित मासिक बैठक में बड़ी संख्या में पालक उपस्थित हुए और कक्षा अध्यापक एवं शिक्षकों से मिलकर अपने पाल्यो की शैक्षणिक प्रगति अन्य गतिविधियों की जानकारी ली वह बहुमूल्य सुझाव दिए, इस अवसर पर प्राचार्य एवं शिक्षकों ने पालकों की भी काउंसलिंग की एवं और त्याग और समर्पण का महत्व बताते हुए उन्हें बेहतर परिणामों के लिए अच्छी परेंटिंग के टिप भी दिये।
उल्लेखनिय है कि इस अवसर पर पालकों के लिए भी रुचिकर प्रतियोगिता रखी गई। जन्माष्टमी के अवसर को देखते हुऐ पालकों के लिए मटकी फोड़ प्रतियोगिता रखी गई जिसमें पालकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। संपुर्ण व्यवस्था विद्यार्थीयों ने की और पालको का उत्साह बढ़ाया विजेता पालकों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया इस अवसर पर पालकों के मनोरंजन के लिए नृत्य और संस्कृति कार्यक्रम भी रखे गए। पुरुष वर्ग पालक राधेश्याम पाटीदार, समरथ पाटीदार विजेता रहे एवं महिला वर्ग श्रीमती राधा पांचाल एवं श्रीमती भारती निनामा ने सफलतापूर्वक मटकी फोड़ी और पुरस्कार प्राप्त किया।
निर्णायक का दायित्व अशोक गौड़ एवं निशिकांत देवड़ा ने निभाया। कार्यक्रम का संचालन श्री जुझार सिंह राठौड़ ने किया एवं आभार श्री वैभव दुबे द्वारा व्यक्त किया गया। इस अवसर पर पालक नितेश राठौर, श्री राजावत , व्याख्याता नीता बैरागी, श्रीमती किरण देवड़ा, श्वेता नागर, एलेन प्रजापत, कैलाश मकवाना, रेवसिंग वसुनिया सहित बड़ी संख्या में पालक उपस्थित थे।

Author: MP Headlines



