राजतिलक; एकलिंगनाथजी के 77वें महाराणा हुए विश्वराज सिंह, 21 तोपों की दी सलामी,

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  •  च‍ित्तौड़ दुर्ग के फतेह प्रकाश महल में सुबह 10 बजे से विश्वराज सिंह मेवाड़ को गद्दी पर बैठाने की परंपरा निभाई
  •  मौके पर विश्वराज का खून से राजतिलक किया गया
  • उदयपुर के पूर्व राज परिवार के सदस्य विश्वराज सिंह मेवाड़ का सोमवार को चित्तौड़गढ़ में पगड़ी दस्तूर हुआ
  • उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई
  • विश्वराज एकलिंग नाथजी के 77वें दीवान होंगे
चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर लगभग 493 साल बाद हजारों राजपूतों की उपस्थिति के बीच धार्मिक और पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ राजतिलक की रस्म का आयोजन किया गया। यह आयोजन दुर्ग पर फतह प्रकाश महल प्रांगण में हुआ। इसमें उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और पूर्व सांसद महेंद्र सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनके बेटे विश्वराज सिंह मेवाड़ के राजतिलक की रस्म अदा की गई। विश्वराज सिंह मेवाड़ इस गद्दी पर बैठने वाले एकलिंगनाथजी के 77वें महाराणा हुए हैं। मेवाड़ के महाराणा खुद को भगवान एकलिंग का दीवान मानते हैं।

सोमवार को कार्यक्रम में मेवाड़ के राव उमराव और ठिकानेदार पारंपरिक वेशभूषा में दुर्ग पर पहुंचे। वहीं देश के कई राजपरिवारों के मुखिया या प्रतिनिधि, सामाजिक, शिक्षा, राजनीतिक, सांस्कृतिक क्षेत्रों के भी कई प्रमुख चेहरे, मेवाड़ के कई संत-महात्मा और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इससे पहले 16वीं सदी में चित्तौड़गढ़ के राजटीले पर महाराणा सांगा के बेटे महाराणा विक्रमादित्य का राजतिलक हुआ था।

प्राचीन राजधानी होने का गौरव जीवंत हो उठा
आज विश्वराज सिंह मेवाड़ की राजतिलक की रस्म के साथ चित्तौड़ के मेवाड़ की प्राचीन राजधानी होने का गौरव जीवंत हो उठा। मेवाड़ की परंपरा अनुसार सलूंबर रावत देवव्रत सिंह राजतिलक की परंपरा निभाई। उसके बाद उमराव, बत्तीसा, अन्य सरदार और सभी समाजों के प्रमुख लोगो ने नजराने पेश किये। इस मौके पर मौजूद अतिथियों ने आयोजन को इतिहास दौहराने वाला बताते हुए विश्वराज सिंह पर एकलिंग दीवान का दायित्व निर्वहन करने का विश्वास जताया।

 

पूर्व राजपरिवार के सदस्य और पूर्व सांसद महेंद्र सिंह मेवाड़ के निधन के बाद अब उनके बेटे विश्वराज सिंह मेवाड़ के उत्तराधिकारी के तौर पर पगड़ी दस्तूर किया गया। विश्वराज वर्तमान में नाथद्वारा से विधायक भी हैं। फतेह प्रकाश महल में राजतिलक कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू हुआ, जो करीब 3 घंटे तक चला।
विश्वराज सिंह मेवाड़ के स्वागत में पूरे रास्ते में फूल बिछाए गए। विभिन्न राजघरानों से आए लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी। पगड़ी दस्तूर के बाद उदयपुर लौटकर सिटी पैलेस स्थित धूणी स्थल और इसके बाद कैलाशपुरी स्थित एकलिंगनाथ मंदिर में दर्शन के लिए जाना प्रस्तावित है।

1531 के बाद पहली बार चित्तौडगढ़ दुर्ग में तिलक कार्यक्रम

गौरतब है कि चित्तौडगढ़ दुर्ग पर आखिरी बार 1531 में महाराणा सांगा के बेटे तत्कालीन महाराणा विक्रमादित्य का तिलक हुआ था। उनका तिलक चित्तौडगढ़ में आखिरी तिलक माना जाता है। सन 1559 में उदयपुर की स्थापना और 1668 में मेवाड़ की राजधानी बनाने के बाद रस्म उदयपुर में होने लगी। इसके बाद पहला मौका है, जिसमें कार्यक्रम चित्तौड़गढ़ में हुआ।

10 नवम्बर को हुआ था महेंद्रसिंह का निधन

गौरतलब है कि पूर्व राजपरिवार के सदस्य महेंद्रसिंह मेवाड़ का निधन 10 नवंबर को हुआ था। वे 40 साल तक पूर्व राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पूर्व महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ के निधन के बाद ज्येष्ठ पुत्र के रूप में महेंद्र सिंह का 19 नवम्बर 1984 को सिटी पैलेस उदयपुर में तिलक कार्यक्रम हुआ था।

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Author: MP Headlines

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