भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान सैलाना से विधायक कमलेश्वर डोडियार ने सहकारिता विभाग से जुड़े मुद्दे पर प्रश्न उठाया। उनके सवाल के जवाब में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि विभागीय प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।
विधायक डोडियार ने सहकारिता विभाग के कार्यों और योजनाओं को लेकर सवाल किए थे, जिसके जवाब में मंत्री ने यह टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा की प्रक्रिया में प्रश्नों के उत्तर देने की कोई अनिवार्य समय सीमा तय नहीं की गई है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस
मंत्री के इस बयान के बाद विधानसभा की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि अगर विधानसभा में पूछे गए सवालों के उत्तर समय पर नहीं मिलते हैं तो इससे जनहित के मुद्दे प्रभावित होते हैं।
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा, “अगर सवालों के उत्तर देने की कोई समय-सीमा नहीं है, तो यह विधानसभा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के लोगों के मुद्दों को हल करने के लिए प्रश्न उठाते हैं। समय पर उत्तर न मिलने से जनता के विकास कार्यों में देरी होती है।”
समय सीमा तय करने की मांग
विधानसभा में इस मुद्दे के उठने के बाद कई सदस्यों ने मांग की है कि प्रश्नों के उत्तर देने के लिए एक निर्धारित समय सीमा तय की जाए। इससे न केवल विधायकों को समय पर जानकारी मिलेगी बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा में उठाए गए सवालों के जवाब समय पर दिए जाने से शासन की पारदर्शिता और प्रभावशीलता में सुधार होगा।
मुद्दे को आगे भी उठाएंगे विधायक
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि वह इस मुद्दे को आगे भी उठाएंगे और मांग करेंगे कि विधानसभा में प्रश्नों के उत्तर देने के लिए समयसीमा निर्धारित की जाए। ताकि सरकार की योजनाओं और कार्यों की जानकारी जनप्रतिनिधियों को समय पर मिल सके और विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।



Author: MP Headlines



