सैलाना। सैलाना नगर में आवारा कुतो पशुओं का कहर हर गली मोहल्ले में जमघाट रूप में रहता है आम नागरिकों को हमेशा अपनी जान बचाकर निकलना पड़ता है। लगातार खतरा बना हुआ है, वही नगर में विगत कुछ वर्षों से युवा एवं बुजुर्ग सांड नन्दी की कुश्ती लगातार हर गली मोहल्ले में आम बात हो चुकी है।
दोनों ही सांड नन्दीदेव एक कहावत को चरितार्थ कर रहे है। रस्सी जल गई पर बट नहीं गया। की तर्ज पर इन नंदी महाराजाओं का आमना सामना अगर हो गया तो निश्चित ही नगर की जनता आम जन व वाहनों को नुकसान होना तय है। इनके लिए कोई माईना नहीं रखता है। इनकी कुश्ती देखने में भी कभी-कभी मजा आता है। किंतु इसके पीछे एक डर भी छुपा रहना लाज़मी है। क्योंकि अंत में परिणाम क्या होगा, यह भी सर्व विदित है, कही वाहनों को नुकसान तो कहीं आमजनों को भी दुर्घटनाओं का भय रहना लाज़मी है।
ऐसा ही नज़ारा आज रविवार को नगर के मुख्य बाजार सदर बाजार में देखने को मिला है। नगर के मुख्य मार्ग पर दोनों का मुकाबला हुआ, दोनों ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। गनीमत रही की एक वाहन पर दो व्यक्ति जैन मन्दिर के पास बाल-बाल बचने के बाद, आमजन के साथ कोई धन हानि नहीं हुई।
दोनों सांडों पर पानी का छिड़काव किया जिससे एक बुजुर्ग सांड ने अपनी हार को स्वीकारते हुए गणेश मंदिर की ओर दौड़ लगा दी, तब जाकर आम नागरिकों व दुकानदारों ने राहत की सांस ली।
प्रश्न यही उठता है कि नगर परिषद सैलाना के पदाधिकारी अधिकारियों को क्या जानकारी नहीं है या अगर जानकारी में है तो फिर इंन दो सांडो के अगर कोई मालिक है, उनके विरुद्ध क्यो एक्शन नही लिया जा रहा है। या फिर परिषद को नगर के इन सांडों को अन्यत्र स्थानांतरित क्यों नहीं किया जा रहा है। आमजन की भावनाओं एवं स्वच्छता सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए इस पर तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता है। ताकि भविष्य में गुमनाम दुर्घटनाओं के भय से मुक्ति मिले।

Author: MP Headlines



