रतलाम 13 दिसंबर/राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली (नालसा) एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार आज 13 दिसंबर (शनिवार) को नेशनल लोक अदालत का आयोजन ए.डी.आर. भवन, जिला न्यायालय रतलाम में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष सुश्री नीना आशापुरे के द्वारा माॅ सरस्वती प्रतीमा पर माल्यार्पण एवं द्वीप प्रज्जवलित कर किया गया।
नेशनल लोक अदालत में सम्पूर्ण जिले में गठित 40 खण्डपीठों में न्यायालय में लंबित समझौता योग्य 1457 प्रकरणों मे से 1068 प्रकरणों का निराकरण किया गया। जिसमें 2289 व्यक्ति लाभान्वित हुए तथा कुल 46762897/ रूपये का अवार्ड पारित किया गया। उक्त लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रयास कर मोटर दुर्घटना दावा के 17 प्रकरणों का निराकरण कर 6665000/- रूपये का अवार्ड पारित किया गया तथा 56 व्यक्ति लाभान्वित हुए।
उपभोक्ता फोरम के 19 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसमें 613946 का अवार्ड पारित किया गया। नेशनल लोक अदालत में प्रीलिटिगेशन (मुकदमा पूर्व) प्रकरणों में बैंकों/फायनेंस कं. एवं बी.एस.एन.एल. के 18 प्रकरणों का निराकरण कर 126353/- रूपये की राशि जमा करवाई गई। जिसमें 34 व्यक्ति लाभान्वित हुए।विद्युत विभाग रतलाम के 136 प्रकरणों का निराकरण कर 2997874/- रूपये की राशि जमा करवाई गई। नगर निगम रतलाम से प्राप्त जानकारी अनुसार जलकर के 522 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिसमें 55,00,000/- राशि जमा कराई गई तथा सम्पत्ति कर के 387 प्रकरणों में 53,00,000/- राशि जमा करवाई गई।
कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार तहसील (राजस्व) न्यायालयों में 317 फोजदारी प्रकरणों तथा 177 राजस्व (रेवेन्यू) प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस प्रकार संपूर्ण जिले में विद्युत विभाग, जलकर, सपंत्तिकर, बी.एस.एन.एल. एवं राजस्व के कुल 1557 प्रिलिटिगेशन प्रकरणो का निराकरण किया गया तथा 1,39,23,353/- रूपये की राशि जमा करवाई गई। जिसमे कुल 1557 व्यक्ति लाभान्वित हुए। नगर निगम की उद्यानिकी शाखा द्वारा समझौता करने वाले पक्षकारों को वितरण करने हेतु निःशुल्क पौधे प्रदाय किये गए। जिनको संबंधित पीठासीन अधिकारी द्वारा पक्षकारो को वितरण किया गया।
आज दिनांक को आयोजित नेशनल लोक अदालत में श्री रामजी गुप्ता, प्रधान जिला न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय रतलाम, श्री रविन्द्र प्रतापसिंह चुण्डावत, विशेष न्यायाधीश/नोडल अधिकारी नेशनल लोक अदालत, जिला न्यायाधीश- श्री संजीव कटारे, श्री आशीष श्रीवास्तव, श्रीमती बरखा दिनकर, श्रीमती श्वेता तिवारी, श्री राजेश नामदेव, श्री निर्मल मण्डोरिया, श्री राकेश कुमार शर्मा, श्री नीरज पवैया, सचिव/न्यायाधीश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रतलाम, श्रीमती सपना भारती कतरोलिया, सी.जे.एम., रेल्वे मजिस्ट्रेट-श्री अतुल यादव, जिला रजिस्ट्रार-श्री अनुपम तिवारी, श्रीमती सपना शर्मा, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायाधीश-श्री जितेन्द्र रावत, सुश्री सपना कनोड़िया, श्रीमती मुग्धा कुमार, सुश्री प्रगति असाटी, श्री अतुल श्रीवास्तव, श्रीमती आकांक्षा शर्मा, सुश्री आकांक्षा श्रीवास्तव, श्री मंगल परमार, सुश्री रूपाली बिरला, श्री प्रवेश काबरा, सुश्री आकांक्षा, श्री अरूणसिंह ठाकुर, सुश्री वैशाली चैहान सहित समस्त न्यायाधीश उपस्थित रहे।
नेशनल लोक अदालत के अवसर पर ए0डी0आर0 भवन में सजावट कर रंगोली बनाई गई। इस अवसर पर श्री नीरज पवैया- सचिव/न्यायाधीश- सुश्री पूनम तिवारी, जिला विधिक सहायता अधिकारी, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ रतलाम- श्री राकेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष श्री सुनील जैन, अधिवक्ता संघ के सचिव श्री चेतन केलवा, श्रीमती आशा शाक्यवार-लोक अभियोजन अधिकारी,एल.डी.एम श्री एम.एल. मीणा, रतलाम एवं समस्त बैंक मैनेजर, श्री जितेन्द्र भारती- कार्यपालन यंत्री एम.पी.ई.बी. शहर संभाग एवं समस्त अधिकारी कर्मचारी, नगर पालिक निगम के अधिकारी/कर्मचारी, पक्षकारगण, न्यायालयीन अधिकारी/कर्मचारीगण, पत्रकारगण, पुलिस अधिकारी/कर्मचारी, बी.एस.एन.एल. विभाग के अधिकारी/कर्मचारी, श्री अनिल शर्मा चीफ एवं अन्य सहायक एल.ए.डी.सी.एस अधिवक्तागण, समस्त खण्डपीठों के अधिवक्ता सदस्यगण, पैरालीगल वालेंटियर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त कर्मचारीगण के द्वारा सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया।
कुटुम्ब न्यायालय द्वारा पति-पत्नी को सकुशल घर भेजा
सफल कहानी: पति ‘एक्स‘ द्वारा पत्नी ‘वाय‘ के विरूद्ध दाम्पत्य संबंधों की पुनस्र्थापना हेतु याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसमें मई 2023 में हुए विवाह के लगभग 2 माह पश्चात् ही पत्नी, पति को छोड़कर अपने मायके निवास करने चली गई थी। पत्नी द्वारा पति को छोड़कर जाते समय वह गर्भवती थी और पृथक निवास करने के दौरान ही उसे संतान उत्पन्न हुई। इसके उपरांत भी पत्नी के साथ निवास न करने के लिये आने पर पति द्वारा वर्ष 2025 में यह प्रकरण प्रस्तुत किया गया था। पति द्वारा याचिका प्रस्तुत किये जाने पर दोनों के मध्य सुलहवार्ता कराई गई, लेकिन पत्नी साथ निवास करने के लिये सहमत नहीं थी। प्रकरण के लंबित रहने के दौरान उभयपक्ष को उनके शासकीय सेवा में रहने से पृथक-पृथक निवास करने के कारण बच्चे को समय न दिये जाने के कारण एवं उसे माता पिता दोनों का स्नेह न मिलने से बच्चे के मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव पड़ने के बारे में समझाइश दी गई और यह बताया गया कि यदि दोनों एक साथ निवास करते हैं तो बच्चे को माता एवं पिता दोनों अधिक समय देकर उसका मानसिक विकास कर सकते हैं, जिससे बच्चे का उज्ज्वल भविष्य होगा। उभयपक्ष द्वारा बच्चे उज्ज्वल भविष्य को लेकर उनको लगातार समझाइश दिये जाने पर वे अंततः साथ निवास करने के लिये सहमत हुए जिन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत में माला पहनाकर एवं पौधा भेंट कर प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष विधिक सेवा प्राधिकरण रतलाम द्वारा साथ निवास करने हेतु सुखद भविष्य की शुभकामनाएं दी।
Author: MP Headlines


















