व्यापारियों ने दिया सुझाव -बसों की संख्या बढ़ती है तो बायपास क्षेत्र में पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध
सैलाना /रतलाम। नगर परिषद सैलाना की कथित तानाशाही और एकतरफा फैसलों के खिलाफ बस स्टैंड स्थित दुकानदारों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। बस स्टैंड परिसर की सुलभ कॉम्पलेक्स लाइन में वर्षों से संचालित दुकानों को हटाने की तैयारी को लेकर व्यापारियों में भारी रोष व्याप्त है। प्रभावित व्यापारियों ने सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार को विस्तृत एवं तीखा ज्ञापन सौंपते हुए इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
व्यापारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कोई अतिक्रमणकारी नहीं हैं, बल्कि पिछले लगभग 30 वर्षों से नगर परिषद को नियमित किराया और टैक्स अदा करते हुए अपनी दुकानें संचालित कर रहे हैं। यही दुकानें उनके परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन हैं। कई व्यापारियों ने इन्हीं दुकानों के भरोसे बैंक से ऋण लेकर मकान बनाए, जिनकी किश्तें आज भी जारी हैं।
बिना लिखित आदेश के दबाव, अब नोटिस की तैयारी
व्यापारियों का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा लंबे समय से मौखिक रूप से दुकानों को खाली करने का दबाव बनाया जा रहा था और अब बाकायदा दुकान खाली कराने के नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। परिषद का इरादा बस स्टैंड विस्तार के नाम पर दुकानों को तोड़ने का है, जबकि नई दुकानें वर्तमान स्थान से 400 से 500 फीट दूर उत्तर-दक्षिण दिशा में प्रस्तावित की जा रही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि बस स्टैंड से दूर दुकानें मिलने का सीधा मतलब है—व्यापार खत्म और परिवार भुखमरी की कगार पर। वर्तमान में यात्रियों की आवाजाही से ही उनका व्यवसाय चलता है, जो नए स्थान पर संभव नहीं होगा।
जर्जर नहीं दुकानें, फिर भी निशाना क्यों?
ज्ञापन में व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी दुकानें पूरी तरह सुरक्षित और उपयोग योग्य हैं। आरोप लगाया गया है कि बस स्टैंड परिसर में कई दुकानें उनसे कहीं अधिक पुरानी और जर्जर स्थिति में हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे परिषद की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। व्यापारियों ने इसे राजनीतिक द्वेष और निजी स्वार्थ से प्रेरित चयनात्मक कार्रवाई बताया है।

सिंहस्थ का बहाना, सैलाना में क्या तुक?
नगर परिषद अध्यक्ष चेतन शुक्ल द्वारा प्रस्तावित कार्रवाई को सिंहस्थ मेले से जोड़ने पर भी व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिंहस्थ उज्जैन में होता है, न कि सैलाना में। ऊपर से सैलाना से उज्जैन के लिए सीधी परिवहन सुविधा तक उपलब्ध नहीं है, फिर बस स्टैंड विस्तार का यह तर्क पूरी तरह भ्रामक और आधारहीन है।व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि भविष्य में यदि बसों की संख्या बढ़ती है तो बायपास क्षेत्र में पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध है, जहां बस स्टैंड का विस्तार किया जा सकता है।
निर्माण चाहिए तो यहीं करें, रोज़गार से खिलवाड़ नहीं
व्यापारियों ने दो टूक कहा है कि यदि पुनर्निर्माण आवश्यक है तो नियमानुसार उसी स्थान पर किया जाए और निर्माण अवधि के दौरान वैकल्पिक दुकानों की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए, ताकि उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट न आए।
ओटले तोड़े, मानसिक उत्पीड़न किया
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूर्व में अतिक्रमण अभियान के नाम पर दुकानों के ओटले तोड़ दिए गए, जिससे व्यापारियों को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। लगातार दुकान खाली करने का दबाव बनाकर उन्हें भय के माहौल में जीने को मजबूर किया जा रहा है।
दी चेतावनी—रोज़गार छिना तो जिम्मेदार होंगे अधिकारी और जनप्रतिनिधि
आवेदनकर्ता श्रीमती सुशीला बोराना, श्रीमती सुभद्रा चंडालिया, रमेशचंद्र बाफना, अनिल मांडोत, रितेश मांडोत, संजय बोराना, शांतिबाई चौहान, अक्रम खान, नाथूलाल गवली सहित अन्य व्यापारियों ने विधायक कमलेश्वर डोडियार से मांग की है कि नगर परिषद की इस कार्रवाई को तत्काल रोका जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दुकानों को यथावत संचालित रहने दिया जाए। व्यापारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी आजीविका से खिलवाड़ किया गया तो इसके लिए नगर परिषद के अधिकारी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे, और व्यापारी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। बताया जाता है कि यहां 17 दुकानदार अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं।
Author: MP Headlines


















