शुभ समय बताने वाली घड़ी, खुद अपने शुभ समय का इंतज़ार कर रही है

सैलाना नगर की जनता की आवाज एमपी हेडलाइंस सैलाना संवाददाता कृष्णा राठौर (पायल ) की कलम से,


सैलाना। रतलाम जिले का ऐतिहासिक नगर सैलाना, जो कभी स्वच्छता और सुव्यवस्थित नगर परिषद के लिए प्रदेश से लेकर देश की राजधानी तक पहचानी जाती थी, आज अपनी ही पहचान खोती नज़र आ रही है। स्वच्छता में अग्रणी कहे जाने वाला सैलाना नगर अब उसी कसौटी पर पिछड़ती दिखाई दे रही है।

नगर के अनेक विकास कार्य वर्षों से अवरुद्ध हैं, नगर के मध्य पुरानी सब्जी मंडी जैसे अन्य और इसी उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है सैलाना का मुख्य प्रवेश द्वार — घंटाघर।
सैलाना नगर, जिसे “सैलाना 5K” के नाम से भी जाना जाता है, उसी नगर का मुख्य द्वार आज मानो ग्रहण का शिकार हो गया है। विगत साढ़े तीन वर्षों से अधिक समय से घंटाघर पर लगी घड़ी बंद पड़ी है, जो न समय बता पा रही है और न ही नगर की पहचान को जीवित रख पा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस ओर न तो जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का ध्यान गया, न ही नगर परिषद के अधिकारियों ने इसे आवश्यक समझा।

धार्मिक और वास्तुशास्त्र के अनुसार बंद घड़ी को घर में रखना भी अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मकता का प्रतीक होती है। ऐसे में नगर के मुख्य प्रवेश द्वार पर बंद घड़ी होना, नगरवासियों को खटक रहा है और शुभ संकेत नहीं देता। नगर की जनता बेसब्री से पूछ रही है — आखिर इस घंटाघर की घड़ी का शुभ समय कब आएगा? कभी इस घड़ी की आवाज़ पूरे नगर में ही नहीं, बल्कि आसपास के 5 किलोमीटर तक गूंजती थी। वही आवाज़ सैलाना की पहचान थी, समय की चेतावनी थी और नगर के अनुशासन का प्रतीक थी।

आज स्थिति यह है कि घंटाघर मौन है और प्रशासन भी।
विडंबना यह है कि इसी द्वार से देश के बड़े-बड़े राजनेता, दिल्ली से आए विपक्ष के नेता, जिले सैलाना के वरिष्ठ अधिकारी निकलते रहे हैं, परंतु किसी भी उच्च अधिकारी की नज़र इस बंद घड़ी पर नहीं पड़ी — या फिर नज़रअंदाज़ कर दी गई।
घड़ी का अस्तित्व ही समय बताने में है। यदि घड़ी समय बताना बंद कर दे, तो उसका मूल्य समाप्त हो जाता है। ठीक उसी तरह, यदि नगर परिषद समय रहते अपनी जिम्मेदारी न निभाए, तो जनता का भरोसा भी समय के साथ खत्म हो जाता है।
नगर और क्षेत्र में हो रही अप्रत्याशित घटनाओं को लेकर भी धर्मशास्त्र में आस्था रखने वाले नागरिक इसे अशुभ संकेत मान रहे हैं। वर्तमान परिषद पर धर्म, परंपरा और नगर की पहचान को नजरअंदाज करने के आरोप लग रहे हैं।

अब सवाल सीधा है —
क्या नगर के मुख्य पालनहार इस ऐतिहासिक घंटाघर की सुध लेंगे? या फिर सैलाना की यह पहचान यूँ ही समय के साथ खामोश होती चली जाएगी? नगर की जनता जवाब और कार्रवाई दोनों का इंतज़ार कर रही है।

MP Headlines
Author: MP Headlines

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