सैलाना। इन दिनों सैलाना क्षेत्र में अफीम के खेतों में फूलों की बहार हो रही है। कई किसानों ने इस बार भी खेतों में अफीम की खेती शासन की देख-रेख में कर रहे है। अफीम के पौधे जैसे-जैसे बड़े होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे किसान भी अब सचेत होते जा रहे हैं। वर्तमान में अफीम के पौधों पर फूल आने आरंभ हो गए हैं, कुछ दिनों बाद अफीम के डोडे आएंगे। उसके बाद उनमे चीरा लगाकर अफीम निकाली जाएगी। उसके पहले किसान किसी भी प्रकार की जोखिम मोल लेना नहीं चाहते हैं। कई किसानों ने अफीम के पोधो को सुरक्षा की दृष्टि से खेत के ऊपर जाली लगाकर पक्षियों से फसल बचाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

नगर के किसान मुखिया जगदीश कुमावत (मामा जी) ने बताया कि यदि एक डोडा भी यदि पशु-पक्षी या कोई अन्य जानवर नुकसान कर दें तो उसके भरपायी महंगी साबित हो सकती है। कुमावत ने बताया कि क्योंकि शासन को तोल से अफीम देना पड़ता है। ऐसे में अफीम कम पड़ जाए तो उसके लिए लाइसेंस पट्टे भी सरकार काट(निरस्त) कर सकती है। इसलिए बच्चों की तरह अफीम के पौधों की देखभाल करने पड़ती है।

किसानों का कहना है कि अफीम की खेती करना हर किसी के बस की बात नहीं है। एक बच्चे से भी ज्यादा इस अफ़ीम फसल का ध्यान रखना पढता है। पूर्व पार्षद एवं किसान हेमंत कुमावत का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से हम अफिम के खेतो के उपर नायलोन की जाली लगा कर अफीम की फसलों को सुरक्षित रखने के उपाय कर रहे हैं।

Author: MP Headlines



