वर्षों की सेवा के बाद नया नियम थोपना अन्याय” — अध्यादेश लाने की मांग तेज
सैलाना। सैलाना ब्लॉक में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर विरोध अब तेज होता जा रहा है। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों ने इस निर्णय को अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से तत्काल राहत देने की मांग उठाई है। इस संबंध में शिक्षकों ने एक विस्तृत ज्ञापन भाजपा मंडल अध्यक्ष पंकज राठौड़ एवं विधायक कार्यालय में प्रतिनिधि बंटी राणा को सौंपा।
ज्ञापन में शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद प्रदेश में पहले से कार्यरत शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू करना न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि इससे उनके रोजगार पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
शिक्षकों ने कहा कि वर्षों से वे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, ऐसे में नए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू करना पूरी तरह अनुचित है।
“अनुभव को नजरअंदाज करना शिक्षा के साथ अन्याय”
शिक्षकों ने बताया कि वे लंबे समय से विद्यालयों में सेवा दे रहे हैं और विभिन्न शैक्षणिक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। स्थानीय भाषा, सामाजिक परिस्थितियों और विद्यार्थियों की जरूरतों की उनकी समझ शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक ताकत है। ऐसे में TET अनिवार्यता थोपना उनके अनुभव और योगदान को दरकिनार करने जैसा है।
RTE Act का हवाला, पूर्व में मिल चुकी थी छूट
ज्ञापन में वर्ष 2010 में लागू RTE Act का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उस समय पहले से कार्यरत शिक्षकों को TET अनिवार्यता से छूट दी गई थी। अब अचानक नियम बदलना न्यायसंगत नहीं है और यह शिक्षकों के हितों के खिलाफ है।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है सीधा असर
शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि यह अनिवार्यता लागू रही तो बड़ी संख्या में शिक्षकों के रोजगार पर खतरा मंडरा सकता है। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है, ऐसे में अनुभवी शिक्षकों का बाहर होना शिक्षा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।
सरकार के सामने रखी गई प्रमुख मांगें
वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को TET अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। RTE Act के प्रावधानों में संशोधन किया जाए
आवश्यक होने पर केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर त्वरित निर्णय ले। नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना सुनिश्चित की जाए। पेंशन, ग्रेच्युटी सहित सभी टर्मिनल लाभ प्रदान किए जाएं।
सैकड़ों शिक्षकों ने दिखाई एकजुटता
ज्ञापन सौंपने के दौरान सैलाना क्षेत्र के सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे और एकजुटता का प्रदर्शन किया। इस दौरान डॉ. मुनीन्द्र दुबे, चरणसिंह चौधरी, धर्मेन्द्र सिंह राठौर, ललित पांचाल, मनोज यादव, नरेन्द्र जाट, जगदीश परिहार, निर्मल चौहान, तोलाराम निनामा, पवन प्रजापति, निर्मला सेनी, ममता शर्मा, गोपाल सिलावट, अशोक कुमावत, हेमलता चौहान सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
सैलाना से उठी यह आवाज अब प्रदेश स्तर पर बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। यदि सरकार समय रहते इस पर निर्णय नहीं लेती, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
Author: MP Headlines


















