जनसेवा से खेती तक, हर जिम्मेदारी को दिल से निभाते हैं जगदीश पाटीदार

पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष की सादगी, कर्मठता और खेती के प्रति समर्पण बनी पहचान

सैलाना। नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ किसान रतलाम जिला कांग्रेस ग्रामीण उपाध्यक्ष जगदीश पाटीदार इन दिनों बारिश पूर्व कृषि तैयारियों में जुटे हुए हैं। अपने खेत पर ऊटी लहसुन की फसल के लिए बेड तैयार करते हुए वे एक बार फिर यह संदेश दे रहे हैं कि जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ खेती-किसानी से जुड़ाव उनकी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है।

मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए जगदीश पाटीदार अपनी कृषि गतिविधियों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। खेत में स्वयं उपस्थित रहकर कृषि कार्यों का संचालन करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। चाहे सार्वजनिक जीवन हो या कृषि क्षेत्र, वे हर कार्य को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करने में विश्वास रखते हैं।

जगदीश पाटीदार की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि वे जिस भी जिम्मेदारी को स्वीकार करते हैं, उसे पूरे मन और दिल से निभाते हैं। वहीं वे अपने आदर्शो के उलट कभी कदम नही रखते, यही कारण रहा कि उन्हें नगर परिषद में कई बार कांग्रेस से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिला। इसके साथ ही उन्होंने संगठन में ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाई। वर्तमान में रतलाम जिला ग्रामीण उपाध्यक्ष है।

पाटीदार को सैलाना नगर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में उन्होंने अपने कार्यों की अमिट छाप छोड़ी है। आप जिला पाटीदार समाज के भी अनेकों पद पर रहे हैं। आज भी नगर के अनेक लोग उन्हें सम्मानपूर्वक “अध्यक्ष जी” के नाम से संबोधित करते हैं। यह सम्मान केवल पद का नहीं, बल्कि वर्षों की जनसेवा, सहज व्यवहार और जनता के प्रति समर्पण का परिणाम है।
आमजन का मानना है कि जगदीश पाटीदार का व्यक्तित्व सरल, निश्चल और मिलनसार है। उनकी कार्यकुशलता तथा लोगों के प्रति आत्मीयता ने उन्हें समाज में विशेष पहचान दिलाई है। खेतों में सक्रिय रहकर वे यह भी साबित करते हैं कि कृषि केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की मजबूत आधारशिला है।

जगदीश पाटीदार का जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि व्यक्ति में सेवा, समर्पण और कर्मठता का भाव हो तो वह सार्वजनिक जीवन और निजी दायित्वों दोनों में समान रूप से सफल हो सकता है। जनसेवा और खेती—दोनों क्षेत्रों में उनका योगदान आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। किसानी के नाते पाटीदार ने यह बात भी स्वीकारी है कि आज की स्थिति में खेती करना बहुत ही जटिल एवं महंगा होता जा रहा है। इसका मुख्यतः कारण देश प्रदेश की सरकारों द्वारा किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं है किसानों को किसी भी तरह लाभ का संदेश नहीं मिल रहा है, कृषि कार्य में लगने वाले संबंधित सभी आवश्यक वस्तुएं चार-पांच गुना महंगी हो गई है।

KRISHNA RATHORE
Author: KRISHNA RATHORE

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