सैलाना, उज्जैनी पर नगर रहा पूर्ण बंद; खेतों में दाल-बाटी का भोग, हल्की बारिश ने जगाई उम्मीद

किसानों और सनातन धर्म प्रेमियों ने परंपरा निभाई, 100 वर्षीय वृद्धा ने भी झूला झूलकर मांगी अच्छी वर्षा की कामना

सैलाना। अच्छी वर्षा की कामना को लेकर सोमवार को सैलाना नगर में सदियों पुरानी आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। उज्जैनी के अवसर पर पूरा नगर स्वैच्छिक रूप से बंद रहा। व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर किसानों और सनातन धर्म प्रेमियों के इस धार्मिक आयोजन को समर्थन दिया।

सुबह से ही किसान, ग्रामीण और श्रद्धालु अपने-अपने खेतों एवं जंगलों में पहुंचे, जहां दाल-बाटी, लड्डू सहित पारंपरिक व्यंजन बनाकर भगवान इंद्रदेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मान्यता है कि इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए उज्जैनी मनाने पर क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है। पूजा के बाद सभी ने प्रसादी ग्रहण की और पारंपरिक झूलों का आनंद लिया।

आस्था का सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब गणेश पाटीदार की दादी पाटीदार समाज की लगभग 100 वर्षीय वृद्ध अम्मा ने भी उत्साहपूर्वक झूला झूलते हुए भगवान इंद्रदेव से भरपूर वर्षा की प्रार्थना की। उनकी अटूट श्रद्धा और उत्साह ने आयोजन को विशेष बना दिया।

लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण किसान चिंतित हैं। मक्का, सोयाबीन और कपास की फसलों को जीवनदान देने वाली वर्षा का इंतजार है। ऐसे में पूरे क्षेत्र ने एक स्वर में इंद्रदेव से अच्छी बारिश की कामना की। इसी बीच पूजा-अर्चना के पश्चात कुछ समय के लिए हल्की बारिश भी हुई। इसे लोगों ने शुभ संकेत मानते हुए विश्वास जताया कि इंद्रदेव शीघ्र ही क्षेत्र पर मेहरबान होंगे और किसानों की मेहनत रंग लाएगी।

उज्जैनी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और आस्था के बीच गहरे संबंध का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि वर्षा संकट के समय आज भी सैलाना अंचल के लोग पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ इस परंपरा का निर्वहन करते हैं।

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Author: MP Headlines

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