सैलाना। रतलाम जिला के सैलाना नगर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को भूरामल कॉलोनी में एक आवारा कुत्ते ने तीन वर्षीय मासूम अयांश और उसके पिता राकेश भील पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घटना के बाद दोनों का उपचार कराया गया। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के चलते नगरवासी अब नगर परिषद और जिला प्रशासन से शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, भूरामल कॉलोनी निवासी तीन वर्षीय अयांश गुरुवार सुबह स्कूल जाने के लिए घर के बाहर खड़ा था। इसी दौरान उसके पिता पास में खड़ी बाइक लेने गए। तभी एक आवारा कुत्ता अचानक वहां पहुंचा और मासूम पर हमला कर दिया। बच्चे की चीख सुनकर पिता उसे बचाने दौड़े, लेकिन कुत्ते ने उन पर भी हमला कर दिया। आसपास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।
गौरतलब है कि 18 जुलाई को भी भोई मोहल्ला क्षेत्र में एक आठ वर्षीय बच्चे पर आवारा कुत्ते ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उस घटना के बाद नगर परिषद की ओर से आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई थी। ऐसे में तीसरी घटना सामने आने के बाद नागरिकों की अपेक्षा है कि यह अभियान अब जल्द शुरू किया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर के कई वार्डों और कॉलोनियों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। सुबह-शाम स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। नागरिकों का मानना है कि समयबद्ध कार्रवाई और नियमित अभियान से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।

नगरवासियों ने नगर परिषद और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान तत्काल शुरू किया जाए, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। साथ ही लोगों ने घायल मासूम अयांश और उसके परिवार के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए प्रशासन से हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने की भी अपेक्षा जताई है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
नगर में लगातार आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं के बीच स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नागरिकों का कहना है कि पार्षद, नगर परिषद अध्यक्ष और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस समस्या को प्राथमिकता से उठाकर नगर परिषद और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करें, ताकि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान शीघ्र शुरू हो सके। साथ ही प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जानना और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की पहल भी जनप्रतिनिधियों के सामाजिक दायित्व का हिस्सा है। जनहित से जुड़े ऐसे मामलों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयास से ही नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।
Author: MP Headlines
