रहवासियों की मांग रहवासी इलाके से दूर हो शराब की दुकान

रतलाम / सरवन रतलाम जिले के ग्राम सरवन पुराने हाई सेकेंडरी स्कूल अषाढ़ी चौराहा क्षेत्र में प्रस्तावित सहकारी देशी-विदेशी शराब दुकान को लेकर अब मामला गंभीर सामाजिक और कानून-व्यवस्था के संकट के रूप में उभरता जा रहा है। ग्रामीणों ने इसे केवल स्थानांतरण का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्र की सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक माहौल पर सीधा खतरा बताया है।

बड़ी संख्या में एकत्रित ग्रामवासियों ने कलेक्टर, एसडीएम, एसडीओपी, आबकारी विभाग एवं थाना प्रभारी को संयुक्त आवेदन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शराब दुकान को आबादी क्षेत्र से हटाकर कम से कम 1 किलोमीटर दूर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो उग्र जनआंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन सौंपते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में बेडदा रोड पर संचालित शराब दुकान को पुनः रहवासी क्षेत्र अर्थात् पुराना हाई सेकेंडरी स्कूल, रतलाम-बांसवाड़ा रोड, अषाढ़ी चौराहे पर स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है। जिस स्थान पर दुकान प्रस्तावित है, वहां महज 100 मीटर की दूरी पर विद्यालय और 150 मीटर पर मंदिर स्थित है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में शराब दुकान खुलने से बच्चों के भविष्य, महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।

स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि इससे न सिर्फ असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्र में अपराध, छेड़छाड़, झगड़े और चोरी जैसी घटनाओं में भी इजाफा हो सकता है। पूर्व के अनुभवों का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने बताया कि शराब दुकान के आसपास रात्रि के समय गाली-गलौज, मारपीट और अशांति आम हो जाती है, जिससे आमजन का जीवन प्रभावित होता है।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधियों में धर्मेंद्र कुमार शर्मा (पिंटू महाराज), रमेश रेगा, ओमप्रकाश निनामा, प्रकाश खराड़ी, कालूसिंह डोडियार, पप्पू डोडियार, बंशी निनामा, राकेश रेगा, प्रकाश रेगा, शेखर रेगा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर इस फैसले का पुरजोर विरोध किया और प्रशासन से मांग की कि शराब दुकान को घनी आबादी से हटाकर कम से कम 1 किलोमीटर दूर स्थापित किया जाए।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज किया, तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले पर क्या ठोस कदम उठाता है

MP Headlines
Author: MP Headlines

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