बावड़ी-नाल में 400 से 500 ग्रामीणों की मौजूदगी में उठा मुद्दा, बोले—ग्रामसभा की सहमति के बिना कोई निर्णय स्वीकार नहीं
सैलाना। ग्राम पंचायत बावड़ी के अंतर्गत ग्राम नाल एवं बावड़ी में वन भूमि से जुड़े विषय को लेकर वन अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामसभा आयोजित की गई। ग्रामसभा में दोनों गांवों से करीब 400 से 500 ग्रामीण शामिल हुए। वन विभाग की भूमि एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) को सौंपे जाने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध जताते हुए ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करने की बात कही।

जल, जंगल और जमीन को लेकर ग्रामीणों ने रखी बात
ग्रामसभा में जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशूराम निनामा ने कहा कि जल, जंगल और जमीन ग्रामीणों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के हितों और अधिकारों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि ग्रामसभा लोकतंत्र की महत्वपूर्ण इकाई है और गांव से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में ग्रामीणों की राय एवं ग्रामसभा की भूमिका को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया
ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े हुए हैं। वन भूमि से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय ग्राम समुदाय की राय और ग्रामसभा की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग रखी कि वन भूमि से जुड़े किसी भी निर्णय में ग्रामसभा की सहमति और स्थानीय समुदाय की भूमिका स्पष्ट की जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और अपने अधिकारों को लेकर वे जागरूक और संगठित रहेंगे।

ब्लॉक से जिला स्तर तक आवाज पहुंचाने की बात
केशूराम निनामा ने ग्रामीणों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की आवाज को ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक पहुंचाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर मजबूती से पक्ष रखा जाएगा।
ग्रामसभा में “जल, जंगल और जमीन हमारा अधिकार है” का संदेश प्रमुखता से सामने आया।
इस अवसर पर बाप ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र पारगी, सरपंच प्रतिनिधि दिलीप पारगी, सोहनलाल अमलियार (मंत्री), लालसिंह भूरिया (पटेल नाल), कैलाश डामर, मुकेश डामर, राजू मयड़ा एवं पप्पू भामर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
Author: MP Headlines





