सैलाना। सैलाना नगर के प्राचीन गोधूलिया हनुमान जी मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं आगमन पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथा के द्वितीय दिवस पर सुप्रसिद्ध कथावाचक परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्री बालकृष्ण नागर ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने मानव जीवन के मूल सिद्धांतों, सनातन संस्कृति की महत्ता और सामाजिक समरसता का गहन संदेश दिया।
रिश्तों में भेदभाव न रखें – गुरुदेव का संदेश
अपने प्रवचन में गुरुदेव नागर ने कहा कि मानव धर्म सबसे बड़ा धर्म है, जिसे हमें अपने आचरण और कर्मों के माध्यम से निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “मानवता की सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।” उन्होंने सनातन धर्म की महिमा बताते हुए कहा कि यह केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है।
गुरुदेव ने विशेष रूप से समाज और परिवार में समानता और प्रेम का संदेश देते हुए कहा—“सच्चा सनातनी वही है, जिसके मन में किसी के प्रति द्वेष न हो और जो हर जीव में परमात्मा का अंश देखे।”
कथा प्रसंगों ने बांधा समां
कथा के दौरान गुरुदेव ने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। विशेष रूप से श्री शुकदेव जी के जन्म और राजा परीक्षित की कथा ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के अंत में पूरा गोशाला परिसर “जय श्री कृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा। भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
Author: MP Headlines

















