विविधता संरक्षण, स्थानीय उपायों से ही वैश्विक समाधान संभव”

सैलाना। सैलाना ब्लॉक के ग्राम जांबूकुडी में  अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस 2026 के अवसर पर वाग्धारा व कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन के नेतृत्व में “आदिवासी पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति संरक्षण पर संवाद” विषयक सामुदायिक कार्यक्रम का आयोजन 22 मई 2026 को किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय संसाधनों एवं सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से जैव-विविधता संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करना था। इस वर्ष की थीम “आदिवासी पारम्परिक एवं स्थानीय ज्ञान से संरक्षित होगी वैश्विक जैव-विविधता” रखी गई, जबकि उप-विषय “नई पीढ़ी के साथ- बीज, वनस्पति, जल और जीवों की विविधता संरक्षण की साझा पहल” रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत जैव-विविधता जागरूकता यात्रा एवं आमंत्रण रैली से हुई, जिसमें सक्षम समूह,बाल स्वराज समूह, ग्राम स्वराज समूह के साथ समुदाय सदस्यों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों, लोकगीतों और नारों के माध्यम से ग्राम भ्रमण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। रैली के दौरान जल, जंगल, जमीन, बीज और जीवों की सुरक्षा को लेकर समुदाय को जागरूक किया गया।

पश्चात जैव-विविधता, पारंपरिक खेती, देशी बीज, वन संरक्षण एवं आदिवासी जीवन शैली पर आधारित लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। संवाद सत्र में वरिष्ठ ग्रामीणजनों, महिलाओं एवं समुदाय प्रतिनिधियों ने अपने विचार और अनुभव साझा किया कि किस प्रकार आदिवासी समाज सदियों से स्थानीय जल स्रोतों, जंगलों, औषधीय वनस्पतियों, पशुधन एवं पारंपरिक बीजों का संरक्षण करता आया है। उन्होंने बताया कि प्रकृति संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं बल्कि संस्कृति, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।

आयोजन में स्थानीय जैव-विविधता पहचान एवं प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसमें देशी बीज, स्थानीय फल, औषधीय पौधे, पारंपरिक खाद्य विविधता को प्रदर्शित किया गया। युवाओं और बच्चों ने लोकगीत एवं संदेशों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण में अपनी भूमिका को अभिव्यक्त किया। सामुदायिक श्रमदान “हलमा” गतिविधि के माध्यम से गाँव के समुदाय ने सामूहिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। इस दौरान समुदाय ने जल स्रोतों, जंगलों और सामुदायिक भूमि संरक्षण हेतु निरंतर मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

संवाद के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि आज विश्व जलवायु परिवर्तन, जल संकट और जैव-विविधता के कम होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आदिवासी समुदायों की पारंपरिक जीवन पद्धति और स्थानीय ज्ञान विश्व को टिकाऊ विकास का मार्ग दिखा सकते हैं। स्थानीय बीज संरक्षण, सामुदायिक जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, जंगलों की सामूहिक सुरक्षा और पशुधन आधारित जीवन प्रणाली जैसे उपाय न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय संकटों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित समुदाय, युवाओं एवं संगठन सदस्यों द्वारा जैव-विविधता संरक्षण शपथ ली गई। सभी ने संकल्प व्यक्त किया कि वे जल, जंगल, जमीन, बीज, वनस्पति एवं जीव विविधता का संरक्षण करेंगे तथा आने वाली पीढ़ियों तक प्रकृति संरक्षण का संदेश पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन ने कहा आदिवासी समुदायों का पारंपरिक ज्ञान केवल स्थानीय धरोहर नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए एक प्रेरणा है। यदि स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रक्रिया के केंद्र में रखा जाए तो “स्थानीय उपायों से ही वैश्विक समाधान संभव” की अवधारणा को व्यवहार में बदला जा सकता है।

MP Headlines
Author: MP Headlines

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