भील प्रदेश की मांग पर केंद्र से मिला लिखित जवाब, अमित शाह ने विधायक डोडियार के पत्र की प्राप्ति की दी सूचना

सैलाना। भील प्रदेश के गठन की मांग को लेकर सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से लिखित जवाब सामने आया है। 10 अगस्त 2026 को जारी पत्र में गृह मंत्री के कार्यालय ने विधायक डोडियार के 14 जुलाई 2026 के पत्र की प्राप्ति की औपचारिक सूचना दी है।

पत्र में विधायक डोडियार द्वारा भील बहुल क्षेत्रों के समग्र विकास तथा पृथक भील प्रदेश के गठन से संबंधित विषय उठाए जाने का उल्लेख किया गया है।केंद्र सरकार द्वारा विधायक के पत्र की लिखित रूप से प्राप्ति की पुष्टि किए जाने को इस मांग से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
चार राज्यों के भील बहुल क्षेत्रों को मिलाकर नया राज्य बनाने की मांग

विधायक कमलेश्वर डोडियार लंबे समय से मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के भील बहुल क्षेत्रों को मिलाकर पृथक भील प्रदेश के गठन की मांग उठा रहे हैं। केंद्र सरकार को भेजे गए ज्ञापनों में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत इन क्षेत्रों को मिलाकर नए राज्य के गठन की मांग प्रमुखता से रखी है।

डोडियार ने इन क्षेत्रों की सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए केंद्र स्तर पर उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने की मांग भी की है, ताकि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का विस्तृत अध्ययन कर आगे की कार्यवाही की जा सके।

AIIMS, IIT और IIM जैसे संस्थान खोलने की मांग
विधायक ने आदिवासी अंचल में शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए AIIMS, IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित करने की मांग भी अपने पत्र में रखी है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध होने से क्षेत्र के आदिवासी युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

इसके अलावा, पृथक राज्य के गठन की प्रक्रिया पूरी होने तक क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए विशेष विकास पैकेज स्वीकृत करने की मांग भी की गई है।

पलायन और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया
विधायक डोडियार ने आदिवासी अंचल की मौजूदा परिस्थितियों को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि आजादी के दशकों बाद भी क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मामले में अपेक्षित विकास से पीछे है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार की तलाश में अन्य क्षेत्रों में पलायन करना पड़ता है। उन्होंने कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और बुनियादी संसाधनों के अभाव को क्षेत्र के विकास में बड़ी बाधा बताते हुए इनके समाधान के लिए दीर्घकालीन और ठोस कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता जताई है।

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Author: MP Headlines