ग्राम उमरथाना के शा. हाईस्कूल में संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया

बिरमावल। समीपस्थ ग्राम उमरथाना के शा. हाईस्कूल में संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया गया जिसमें प्राचार्य अनिल कुमार जोशी व संस्कृत शिक्षक मनीष द्विवेदी द्वारा “संस्कृतम् कीमर्थकम् आवश्यकम्” विषय पर व्याख्यान दिया गया।

व्याख्यान में संस्कृत भाषा केवल प्राचीन धरोहर नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और तकनीकी युग की भी जरूरत है। संस्कृत भाषा ज्ञान की जननी है संस्कृत को अधिकांश भारतीय भाषाओं की जननी माना जाता है। हिंदी, मराठी, गुजराती और दक्षिण भारतीय भाषाओं के कई शब्द इसी से लिए गए हैं। वैज्ञानिक संरचना संस्कृत की व्याकरण व्यवस्था पूरी तरह वैज्ञानिक और स्पष्ट है। इसमें उच्चारण का कोई भ्रम नहीं होता है।

कंप्यूटर और तकनीकी उपयोग इसकी सटीक संरचना कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है। मानसिक विकास के लिए संस्कृत के श्लोकों और मंत्रों के उच्चारण से स्मरण शक्ति, ध्यान और तर्कशक्ति में वृद्धि होती है। इसे ‘संस्कृत इफेक्ट’ भी कहा जाता है।

समृद्ध साहित्य: वेद, उपनिषद, महाभारत और रामायण जैसे महान ग्रंथ इसी भाषा में रचे गए हैं। इसमें गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा का भी अनमोल ज्ञान छिपा है। भारत और विश्व के लिए संस्कृत का महत्त्व. संपादित करें. संस्कृत कई भारतीय भाषाओं की जननी है इनकी अधिकांश शब्दावली या तो संस्कृत से ली गई है

संस्कृत का उदय संस्कृत का महत्व और इस भाषा को सीखने के कई लाभ हैं, जो न केवल मानसिक विकास में सहायक हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति में भी मदद करते हैं।का महत्व और उपयोगिता बताते हुए छात्रों को संस्कृत विषय को अध्यापन विषयों में शामिल कर अपना करियर बनाने करने के लिए प्रेरित किया गया।

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Author: MP Headlines