सुख-समृद्धि की कामना के साथ महिलाओं ने किया दशा माता पूजन, पीपल वृक्ष पर बांधे आस्था के डोरे

सैलाना। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर शुक्रवार को सैलाना नगर में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में श्रृंगारित होकर श्रद्धा और भक्ति के साथ दशा माता का पूजन किया। परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलकामना के लिए नगर के विभिन्न धार्मिक स्थलों एवं पीपल वृक्षों के पास पहुंचकर महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर दशा माता को प्रसन्न करने की कामना की। महिलाओं ने पीपल वृक्ष की पूजा कर उसके चारों ओर धागा (डोरा) बांधा और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। परंपरा के अनुसार व्रत रखने वाली महिलाओं ने पूरे दिन संयम का पालन करते हुए एक ही प्रकार का अन्न ग्रहण किया।

दशा माता पूजन के बाद गले में पहने जाने वाले पवित्र धागे (डोरे) का विशेष महत्व माना जाता है, जिसे महिलाएं पूरे वर्ष तक धारण करती हैं। मान्यता है कि यह डोरा परिवार को संकटों से बचाकर सुख-समृद्धि प्रदान करता है। पूजन के पश्चात महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक दशा माता की कथा भी सुनी। इस पूजा के पीछे प्रचलित पौराणिक कथा राजा नल और रानी दमयंती से जुड़ी है, जिसमें दशा माता के कोप और कृपा का उल्लेख मिलता है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश मिलता है कि सच्ची आस्था और भक्ति से जीवन की कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है।

पूरे नगर में दशा माता पूजन का धार्मिक और श्रद्धामय वातावरण देखने को मिला, जहां महिलाओं ने उत्साह और आस्था के साथ इस परंपरा का निर्वहन किया।

दशा माता व्रत के पहले नई झाड़ू लेने की परंपरा धार्मिक मान्यता और प्रतीकात्मक अर्थ से जुड़ी होती है। इसके पीछे मुख्य कारण ये माने जाते हैं—
1. शुद्धता और नई शुरुआत का प्रतीक
दशा माता का व्रत घर-परिवार की सुख-समृद्धि और ग्रहों की शुभ दशा के लिए किया जाता है। इसलिए व्रत शुरू होने से पहले नई झाड़ू से घर की सफाई करना नकारात्मकता और दरिद्रता को दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
2. लक्ष्मी का आगमन
हिंदू मान्यता में झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। नई झाड़ू लाकर घर की सफाई करना यह संकेत देता है कि घर में लक्ष्मी और समृद्धि का स्वागत किया जा रहा है।
3. पुरानी अशुद्धियों का त्याग
पुरानी झाड़ू से जुड़ी हुई धूल-मिट्टी और नकारात्मकता को छोड़कर नई झाड़ू लेना पुरानी समस्याओं और बुरी दशा को समाप्त करने का संकेत माना जाता है।
4. व्रत की पवित्रता बनाए रखना
क्योंकि दशा माता व्रत में पीपल वृक्ष की पूजा, धागा बांधना और परिवार की मंगल कामना की जाती है, इसलिए घर और पूजा-स्थान की पूर्ण पवित्रता बनाए रखने के लिए नई झाड़ू का उपयोग किया जाता है।

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Author: MP Headlines

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