तालाब निर्माण निरस्त होने पर बोरदा में उबाल: उपाध्यक्ष केशुराम निनामा के नेतृत्व में धरना, ग्रामीणों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

सैलाना। रतलाम जिले के सैलाना विकासखंड की ग्राम पंचायत बोरदा में प्रस्तावित तालाब निर्माण कार्य निरस्त किए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। इसी के विरोध में जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुराम निनामा और भारत आदिवासी पार्टी जिला अध्यक्ष रमेश खराडी, सरपंच कमलसिंह मईडा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने गांव में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि यह तालाब क्षेत्र की जीवनरेखा साबित हो सकता था। इससे न केवल जल संकट से राहत मिलती, बल्कि किसानों की खेती भी सुदृढ़ होती। लेकिन निर्माण कार्य निरस्त होने से गांव के विकास को गहरा झटका लगा है और लोगों में निराशा के साथ आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए और तालाब निर्माण कार्य पुनः शुरू किया जाए। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस तालाब निर्माण कार्य का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 फरवरी 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए थे। लगभग 46.98 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस तालाब से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने के साथ कृषि उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद थी।

ग्रामीणों के प्रमुख आरोप और सवाल:
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का अपमान: ग्रामीणों का कहना है कि जिस कार्य का भूमि पूजन देश के प्रधानमंत्री ने किया, उसे स्थानीय राजनीति के चलते निरस्त करना जनता और व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।

गलत आधार पर निरस्तीकरण: ग्रामीणों ने भूमि विवाद की बात को सिरे से नकारा है। उनका कहना है कि इस तालाब से क्षेत्र का जलस्तर बढ़ता और किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलती।

पक्षपात का आरोप: स्वीकृत बजट को बोरदा (सैलाना जनपद) से हटाकर रतलाम जनपद में स्थानांतरित करने को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

फिलहाल स्थानीय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते जनदबाव को देखते हुए अधिकारियों पर जल्द निर्णय लेने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

बोरदा की जनता के हक के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिस विकास कार्य की राह ग्रामीण लंबे समय से देख रहे थे, उसे बिना ठोस कारण के निरस्त करना दुर्भाग्यपूर्ण है। जब तक तालाब का काम वापस शुरू नहीं होता, धरना जारी रहेगा।
केशु निनामा, जिला जनपद उपाध्यक्ष

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Author: MP Headlines

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