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मां चामुंडा धाम: आस्था, इतिहास और पुरातत्व का अद्भुत संगम, नवरात्र में उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था ‘चामुंडा नगरी’ नामकरण, मंदिर के विकास के लिए करोड़ों रुपये के कार्य स्वीकृत

 

रतलाम/बड़नगर। मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम गजनीखेड़ी स्थित मां चामुंडा धाम श्रद्धा, प्राचीन इतिहास और पुरातात्विक विरासत का अनूठा केंद्र है। महिषासुर मर्दिनी मां चामुंडा का यह प्राचीन मंदिर मालवा सहित निमाड़, इंदौर अंचल और देश के विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। नवरात्र, अमावस्या और मेले के अवसर पर यहां हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

 

मुख्यमंत्री ने दिया ‘चामुंडा नगरी’ नाम

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्रवासियों की मांग और जनभावनाओं के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 जनवरी 2025 को ग्राम पंचायत गजनीखेड़ी का नाम बदलकर ‘चामुंडा नगरी’ किया था। यह धाम बड़नगर से लगभग 18 किलोमीटर, उज्जैन से 65 किलोमीटर और रतलाम से करीब 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बताया जाता है। रुणीजा रेलवे स्टेशन यहां से लगभग 500 मीटर दूर है।

छठी-सातवीं शताब्दी से जुड़ा मंदिर का इतिहास

 

मंदिर के निर्माण को छठी-सातवीं शताब्दी का माना जाता है। इसकी स्थापत्य शैली और प्राचीन अवशेष इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं। मंदिर को भूमिज शैली का उत्कृष्ट उदाहरण बताया जाता है। मंदिर परिसर में गर्भगृह में मां चामुंडा की प्रतिमा विराजमान है। साथ ही स्कंद माता और प्रति स्कंद माता की प्रतिमाएं तथा दुर्लभ शेषशायी गणेश प्रतिमा भी यहां स्थापित हैं।

 

प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने इस क्षेत्र के पुरातात्विक महत्व को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में वर्ष 1981 से गजनीखेड़ी और रुणीजा के टीलों पर पुरातात्विक उत्खनन कराया गया। उत्खनन में परमारकालीन अवशेष, मृद्भांड, धातु के सिक्के और मुद्राएं मिलने की जानकारी दी जाती है।

 

मंदिर परिसर में प्राचीन शिलालेख और अन्य अवशेष

 

मंदिर का परमार काल में जीर्णोद्धार होने का उल्लेख मिलता है। स्थानीय ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, 13वीं शताब्दी में औदिच्य ब्राह्मणों और पालवा राजघराने द्वारा भी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। मंदिर की बाहरी दीवार पर नागरी लिपि में उत्कीर्ण प्राचीन शिलालेख इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं। परिसर में प्राचीन छतरियां और एक कुंड भी स्थित हैं। मंदिर वर्तमान में पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।

 

मां के तीन स्वरूपों के दर्शन की मान्यता

 

स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, मां चामुंडा दिन में तीन स्वरूपों में दर्शन देती हैं। भक्तों की मान्यता है कि सुबह माता बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम को प्रौढ़ावस्था के स्वरूप में दिखाई देती हैं। इसे श्रद्धालु माता का जागृत और चमत्कारिक स्वरूप मानते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने पर भक्तों को मानसिक शांति और कष्टों से उबरने का संबल मिलता है।

 

मंदिर में शैव-शाक्त परंपरा के अनुरूप पूजा-अर्चना की जाती है। परंपरागत पुजारी परिवार नियमित रूप से सेवा-पूजा करते हैं। प्रतिदिन सुबह-शाम आरती, दुर्गा सप्तशती का पाठ और अखंड ज्योत की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालु माता को चुनरी, पान और नारियल अर्पित कर मनोकामनाएं मांगते हैं।

 

नवरात्र में कन्या पूजन और भव्य भंडारा

 

मां चामुंडा धाम में चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख धार्मिक उत्सव हैं। महाअष्टमी पर भक्तों के सहयोग से 2,100 से अधिक कन्याओं के पूजन और भव्य भंडारे का आयोजन किए जाने की जानकारी है। सावन माह में हरियाली अमावस्या के अगले दिन मंदिर परिसर में एक दिवसीय मेले का आयोजन होता है।

 

सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन लगभग 500 से 1,000 श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है, जबकि नवरात्र, अमावस्या और मेले के अवसर पर यह संख्या 10 हजार से 25 हजार तक पहुंचने की बात कही जाती है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भोजन बनाने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

 

मंदिर विकास के लिए करोड़ों रुपये के कार्य

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़नगर विधायक जितेंद्र सिंह पंड्या की मांग पर मां चामुंडा धाम के विकास के लिए 3 करोड़ 48 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत किए हैं। 18 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और बड़नगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों तथा बड़नगर नगर में लगभग 35 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया।

 

मां चामुंडा धाम आज भी धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राचीन स्थापत्य, पुरातत्व और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच मंदिर के संरक्षण और सुविधाओं का विकास इस ऐतिहासिक धरोहर को आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

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Author: MP Headlines