रतलाम। विजयादशमी के अवसर पर कलेक्टर अजय कटेसरिया अपनी पत्नी के साथ जवाहर नगर स्थित श्री रामकृष्ण विवेकानंद आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने बंगाली समाज द्वारा स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बंगाली परंपरा के अनुसार आयोजित पूजा में कलेक्टर सपत्नीक शामिल हुए।
1974 में शुरू हुई थी दुर्गा पूजा की परंपरा
रतलाम में बंगाली समाज द्वारा आयोजित सार्वजनिक दुर्गा पूजा महोत्सव इस वर्ष लगातार 53वें वर्ष में आयोजित किया जा रहा है। यह परंपरा वर्ष 1974 में कालिका माता मंदिर परिसर से शुरू हुई थी। इसके बाद से विगत कई वर्षों से जवाहर नगर स्थित श्री रामकृष्ण विवेकानंद आश्रम में श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का संगम है दुर्गा पूजा
बंगाली समाज की दुर्गा पूजा अपनी विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जानी जाती है। महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में समाजजन श्रद्धापूर्वक शामिल होते हैं।
सिंदूर खेला है दुर्गा पूजा का विशेष आकर्षण
बंगाली परंपरा में मां दुर्गा की विदाई से पहले आयोजित होने वाला सिंदूर खेला विशेष महत्व रखता है। इस रस्म में महिलाएं मां दुर्गा की प्रतिमा को सिंदूर अर्पित करती हैं। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मिठाई खिलाती हैं। यह परंपरा मां दुर्गा की विदाई के अवसर पर श्रद्धा और उल्लास के साथ निभाई जाती है।

रतलाम में बंगाली समाज का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ शहर की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं को भी दर्शाता है।
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