600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही परियोजना, 51 एमसीएम पानी संग्रहित कर शिप्रा नदी में प्रवाहित करने की योजना
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के जल से स्नान कराने का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना का 84 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के माध्यम से शिप्रा नदी के पानी को संग्रहित कर आवश्यकता के अनुसार वापस नदी में प्रवाहित किया जाएगा।
अब तक उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ के दौरान गर्मी के मौसम में शिप्रा नदी में पानी की कमी होने पर गंभीर नदी और नर्मदा नदी से पानी लाकर श्रद्धालुओं को स्नान कराया जाता रहा है। ऐसे में वर्ष 2028 के सिंहस्थ में शिप्रा के अपने जल से स्नान कराने की योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेवरखेड़ी में बनाया गया बैराज
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल के अनुसार, परियोजना के तहत शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी गांव में बैराज का निर्माण किया गया है। इसकी जल संग्रहण क्षमता 1.45 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) है। बारिश के दौरान बैराज में पानी एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद 1350 किलोवाट की चार मोटरों की सहायता से लगभग 6.5 किलोमीटर की दूरी तक पानी पंप करके सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा।
सिलारखेड़ी में 51 एमसीएम पानी होगा संग्रहित
परियोजना के अंतर्गत सिलारखेड़ी तालाब का विस्तार कर लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में बैलेंसिंग रिजर्वायर तैयार किया जा रहा है। इसके लिए आसपास की शासकीय भूमि का उपयोग किया गया है, जबकि करीब 35 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया है।
इस रिजर्वायर में लगभग 51 एमसीएम यानी करीब 1800 एमसीएफटी पानी संग्रहित किया जा सकेगा। जलाशय के चारों ओर लगभग 6.5 किलोमीटर लंबा मिट्टी का बांध बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई सतह से करीब 20 मीटर बताई गई है। परियोजना का उद्देश्य वर्षा के दौरान उपलब्ध शिप्रा जल का संग्रहण कर उसे बाद में उपयोग में लाना है।
बिना पंपिंग के शिप्रा में पहुंचेगा पानी

इस परियोजना की खास बात यह है कि सिलारखेड़ी में संग्रहित पानी को वापस शिप्रा नदी तक पहुंचाने के लिए अलग से पंपिंग की आवश्यकता नहीं होगी। योजना के अनुसार, लगभग 5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पानी गुरुत्वाकर्षण बल (ग्रेविटी) से कुंवारिया गांव के पास शिप्रा नदी में छोड़ा जाएगा।
यह स्थान किठोदा बैराज के ऊपर स्थित है। यहां से पानी शनि मंदिर, गऊघाट होते हुए रामघाट, मंगलनाथ और सिद्धनाथ क्षेत्र तक पहुंच सकेगा। इस व्यवस्था से संग्रहित पानी को धीरे-धीरे




