सोच सकारात्मक हो और नीयत समाजहित की हो तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती

जब समाज जागता है, तो समाधान स्वयं रास्ता बना लेता है

सैलाना। रतलाम जिले के सैलाना नगर में लंबे समय बाद एक ऐसा जनहितैषी कार्य देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि यदि सोच सकारात्मक हो और नीयत समाजहित की हो तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती।

सैलाना विद्युत मंडल के सामने स्थित कॉलोनी के पास सड़क किनारे लगे बबूल के वृक्ष वर्षों से प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल बने हुए थे। हर वर्ष हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले ये पक्षी इन वृक्षों पर घोंसले बनाते, अंडे देते और अपने बच्चों का पालन-पोषण कर वापस लौट जाते। यह दृश्य प्रकृति का सुंदर संतुलन तो दर्शाता था, लेकिन समय के साथ यह स्थिति राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए समस्या का कारण भी बनने लगी।पक्षियों के अधिक संख्या में रहने से पेड़ों के नीचे गंदगी फैलती थी। कई बार घोंसले या छोटे पक्षी नीचे गिर जाते थे, जिससे उनकी असमय मृत्यु हो जाती थी। वहीं राहगीर इन पेड़ों के नीचे से गुजरने से बचने के लिए व्यस्त सड़क पर गलत दिशा से निकलते थे, जिसके कारण दुर्घटनाओं की आशंका और घटनाएं बढ़ रही थीं।

पक्षियों के अधिक संख्या में रहने से पेड़ों के नीचे गंदगी फैलती थी। कई बार घोंसले या छोटे पक्षी नीचे गिर जाते थे, जिससे उनकी असमय मृत्यु हो जाती थी। वहीं राहगीर इन पेड़ों के नीचे से गुजरने से बचने के लिए व्यस्त सड़क पर गलत दिशा से निकलते थे, जिसके कारण दुर्घटनाओं की आशंका और घटनाएं बढ़ रही थीं।यह समस्या वर्षों से सबके सामने थी, परंतु समाधान के लिए ठोस पहल का अभाव था। हाल ही में कुछ जागरूक युवाओं की टोली ने इस विषय को गंभीरता से लिया। सामाजिक कार्यकर्ता और जीव मैत्री परिवार के इंद्रेश चंडालिया के नेतृत्व में राजेंद्र कुमावत, रिंकू जी पांचाल, प्रशांत दवे और पीयूष जैन ने मिलकर समझदारी और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सड़क की ओर फैली हुई डालियों की सावधानीपूर्वक छंटाई करवाई।

यह समस्या वर्षों से सबके सामने थी, परंतु समाधान के लिए ठोस पहल का अभाव था। हाल ही में कुछ जागरूक युवाओं की टोली ने इस विषय को गंभीरता से लिया। सामाजिक कार्यकर्ता और जीव मैत्री परिवार के इंद्रेश चंडालिया के नेतृत्व में राजेंद्र कुमावत, रिंकू जी पांचाल, प्रशांत दवे और पीयूष जैन ने मिलकर समझदारी और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सड़क की ओर फैली हुई डालियों की सावधानीपूर्वक छंटाई करवाई।विशेष सराहना के पात्र हैं मोहन दादा, जिन्होंने जोखिम उठाकर पेड़ों की छंटाई का कार्य किया। साथ ही शांति वन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र जी शुक्ला की सक्रियता भी उल्लेखनीय रही, जिन्होंने कटे हुए डालों को व्यवस्थित रूप से शांति वन पहुंचाने की व्यवस्था की।

विशेष सराहना के पात्र हैं मोहन दादा, जिन्होंने जोखिम उठाकर पेड़ों की छंटाई का कार्य किया। साथ ही शांति वन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र जी शुक्ला की सक्रियता भी उल्लेखनीय रही, जिन्होंने कटे हुए डालों को व्यवस्थित रूप से शांति वन पहुंचाने की व्यवस्था की।यह कार्य केवल छंटाई नहीं था, बल्कि यह एक संतुलित सोच का उदाहरण था-
▫️न तो पक्षियों के आश्रय को पूर्णतः नष्ट किया गया,
▫️न ही राहगीरों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया।

यह कार्य केवल छंटाई नहीं था, बल्कि यह एक संतुलित सोच का उदाहरण था-
▫️न तो पक्षियों के आश्रय को पूर्णतः नष्ट किया गया,
▫️न ही राहगीरों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया।

इस पहल ने यह संदेश दिया है कि सामाजिक समस्याओं का समाधान विरोध या उपेक्षा से नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच से संभव है।आज आवश्यकता है कि समाज का हर जागरूक नागरिक ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं पर भी ध्यान दे। क्योंकि अक्सर बड़ी समस्याओं की जड़ छोटी उपेक्षाओं में ही छिपी होती है।
सैलाना के इन जागरूक नागरिकों का यह प्रयास निश्चित ही सामाजिक जागरूकता और जनसहभागिता की प्रेरणादायक मिसाल है।

आज आवश्यकता है कि समाज का हर जागरूक नागरिक ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं पर भी ध्यान दे। क्योंकि अक्सर बड़ी समस्याओं की जड़ छोटी उपेक्षाओं में ही छिपी होती है।
सैलाना के इन जागरूक नागरिकों का यह प्रयास निश्चित ही सामाजिक जागरूकता और जनसहभागिता की प्रेरणादायक मिसाल है। जब समाज जागता है, तो समाधान स्वयं रास्ता बना लेता है।

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Author: MP Headlines