4,622.02 हेक्टेयर भूमि का खसरा, बी-1, नक्शे और देवस्थान पंजी से होगा मिलान, अनधिकृत नामांतरण और कब्जे पर नजर
रतलाम, 7 अक्टूबर 2026। जिले में शासन प्रबंधित देवस्थानों की भूमि के संरक्षण और राजस्व अभिलेखों को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन ने व्यापक सत्यापन अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व), तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को देवस्थान भूमि के राजस्व अभिलेखों का मिलान कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिले में कुल 1,780 शासन प्रबंधित देवस्थान दर्ज हैं, जिनकी कुल भूमि 4,622.02 हेक्टेयर है। प्रशासन अब इन देवस्थानों की भूमि का राजस्व अभिलेखों, खसरा, बी-1, नक्शे, पूर्व अभिलेख, देवस्थान पंजी और शासन स्तर से उपलब्ध सूची से मिलान करेगा।
देवता या देवस्थान के नाम से होगी भूमिस्वामी प्रविष्टि
कलेक्टर के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शासन प्रबंधित देवस्थानों की कृषि एवं अन्य भूमि का उपयोग देवस्थान के रखरखाव, पूजा-अर्चना और संबंधित धार्मिक कार्यों के लिए किया जाना है। ऐसी भूमि को अनधिकृत नामांतरण, विक्रय, बंधक, कब्जे, अतिक्रमण अथवा अन्य दुरुपयोग से सुरक्षित रखना राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ मध्यप्रदेश एवं अन्य बनाम पुजारी उत्थान एवं कल्याण समिति एवं अन्य, 6 सितंबर 2021 के निर्णय का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार मंदिर से संबद्ध भूमि के स्वामी अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं, जिन्हें कानून की नजर में विधिक व्यक्तित्व प्राप्त है।
प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि राजस्व अभिलेखों में भूमिस्वामी के रूप में संबंधित देवता अथवा देवस्थान का नाम नियमानुसार दर्ज होना सुनिश्चित किया जाए। केवल पुजारी होने के आधार पर किसी व्यक्ति का देवस्थान की भूमि पर व्यक्तिगत स्वामित्व या भूमिस्वामी अधिकार नहीं माना जाएगा।
पुजारी का नाम केवल निर्धारित स्थिति में टिप्पणी कॉलम में
जहां कोई पुजारी वास्तविक रूप से पूजा-अर्चना और देवस्थान से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर रहा है, वहां लागू नियमों के अनुसार उसका नाम टिप्पणी कॉलम में केवल “पुजारी” की हैसियत से दर्ज किया जा सकेगा। ऐसी प्रविष्टि से संबंधित व्यक्ति को भूमि पर स्वामित्व अथवा हस्तांतरण का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
शासन प्रबंधित अथवा राज्य शासन में निहित सार्वजनिक देवस्थानों के मामले में लागू निर्देशों के अनुसार प्रबंधकीय प्रविष्टि “मध्यप्रदेश शासन द्वारा, कलेक्टर जिला रतलाम, प्रबंधक” के रूप में सुनिश्चित की जाएगी।
तहसीलवार देवस्थान और भूमि
प्रशासन द्वारा उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में देवस्थान भूमि का विवरण इस प्रकार है—
- – रतलाम: 623 देवस्थान, 1,730.50 हेक्टेयर
- – जावरा: 316 देवस्थान, 791.01 हेक्टेयर
- – पिपलौदा: 319 देवस्थान, 913.65 हेक्टेयर
- – आलोट: 291 देवस्थान, 662.52 हेक्टेयर
- – ताल: 154 देवस्थान, 304.09 हेक्टेयर
- – सैलाना: 64 देवस्थान, 195.95 हेक्टेयर
- – बाजना: 2 देवस्थान, 2.36 हेक्टेयर
- – रावटी: 11 देवस्थान, 21.94 हेक्टेयर
इसके अलावा जिले के बाहर स्थित 41 देवस्थानों की 212.621 हेक्टेयर भूमि भी रतलाम जिले में स्थित बताई गई है।
खसरा, बी-1 और नक्शे से होगा मिलान
प्रत्येक तहसील में शासन प्रबंधित देवस्थानों की सूची का राजस्व अभिलेखों से मिलान किया जाएगा। प्रत्येक देवस्थान के लिए देवस्थान या देवता का नाम, ग्राम एवं तहसील, वर्तमान राजस्व प्रविष्टि, वर्तमान पुजारी का नाम और वर्तमान खसरे की प्रति सहित अलग विवरण तैयार किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य देवस्थान भूमि की वास्तविक अभिलेखीय स्थिति सामने लाना और जहां आवश्यक हो वहां राजस्व रिकॉर्ड में नियमानुसार सुधार करना है।
अनधिकृत विक्रय या नामांतरण मिलने पर तत्काल सूचना

कलेक्टर ने देवस्थान संपत्तियों के संरक्षण से जुड़े इस कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। किसी देवस्थान की भूमि में अनधिकृत विक्रय, नामांतरण, कब्जा या राजस्व अभिलेख में गंभीर त्रुटि मिलने पर तत्काल संबंधित अनुविभागीय अधिकारी और कलेक्टर कार्यालय को जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में शासन प्रबंधित देवस्थान भूमि के रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट होने और सरकारी/देवस्थान संपत्तियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







