मासक्षमण तप की पूर्णाहुति पर हुआ बहुमान समारोह, साध्वी मंडल ने की तप की अनुमोदना
सैलाना। रंगवाड़ी मोहल्ला स्थित अणु आराधना भवन में चातुर्मास के दौरान धर्म-आराधना, त्याग और तपस्या का क्रम निरंतर जारी है। आचार्य उमेशमुनिजी के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तक जिनेंद्रमुनिजी की आज्ञानुवर्ती पुण्य पुंज साध्वी पुण्यशीलाजी की सुशिष्या साध्वी अनुपमशीलाजी, नेहप्रभाजी, चतुर्गुणाजी, प्रतिज्ञाजी, अंजलिजी, गुणज्ञाजी एवं अर्पणाजी ठाणा-सात की निश्रा में प्रतिदिन विविध धार्मिक आराधनाएं संपन्न हो रही हैं।

इसी क्रम में शीतला माताजी गली निवासी तपस्वी मीना-सुनील रांका ने 33 उपवास अर्थात मासक्षमण की कठोर तपस्या पूर्ण कर धर्म समाज में विशेष उदाहरण प्रस्तुत किया। वर्षावास के दौरान यह दूसरा मासक्षमण पूर्ण हुआ है।
तपस्या की पूर्णता पर आयोजित बहुमान समारोह में साध्वी मंडल ने तप की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए तपस्वी मीना रांका की कठोर तपस्या की अनुमोदना की और उन्हें खूब-खूब धन्यवाद एवं साधुवाद दिया। साथ ही, इस कठिन तपस्या में सहयोग और संबल प्रदान करने वाले परिजनों के प्रति भी साध्वी मंडल ने आभार व्यक्त किया।
तप की बोली लगाकर किया बहुमान
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा तप की बोली लगाकर मासक्षमण तपस्वी मीना रांका का बहुमान किया गया तथा अभिनंदन-पत्र भेंट किया गया। वहीं जैन धर्मशाला प्रबंधन समिति की ओर से भी तपस्वी का अभिनंदन-पत्र भेंटकर सम्मान किया गया।
धर्मसभा के दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्वी मीना रांका के सम्मान में जयकारे लगाए और उनकी तपस्या की अनुमोदना की। इसके पश्चात तपस्वी मीना रांका का विधिवत पारणा करवाया गया।
33 उपवास की इस कठिन तपस्या ने चातुर्मास की धर्म-आराधना में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया। समाजजनों ने तपस्वी के संयम, त्याग और आत्मबल की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।



