रतलाम, 3 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ग्राम कंसेर, विकासखंड पिपलोदा की श्रीमती कृष्णा कपासिया इसकी प्रेरक मिसाल हैं। आदर्श आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि सैकड़ों महिलाओं को भी समूहों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है।
कृष्णा कपासिया का ग्राम संगठन सरस्वती आजीविका ग्राम संगठन तथा संकुल स्तरीय संगठन प्रतिभा संकुल स्तरीय संगठन, कालूखेड़ा है। वर्ष 2019 में समूह से जुड़ने से पहले वे गृहिणी थीं और खेतों में मजदूरी भी करती थीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सीआई राशि के रूप में 20 हजार रुपए प्राप्त हुए। इस राशि से उन्होंने पार्लर शुरू किया। इसके बाद समूह के माध्यम से उन्हें 40 हजार रुपए का सीसीएल ऋण मिला, जिससे उन्होंने कॉस्मेटिक दुकान शुरू की।
व्यवसाय शुरू होने के बाद उनकी आय में वृद्धि हुई और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने लगीं। इसके साथ ही उन्होंने अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
70-80 समूहों का गठन, 700-800 महिलाओं को जोड़ा
कृष्णा ने सीआरपी के रूप में गांव-गांव जाकर करीब 70 से 80 स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया तथा लगभग 700 से 800 महिलाओं को समूहों से जोड़ा। इसके बाद उनका चयन बैंक सखी के रूप में हुआ।
कालूखेड़ा सेंटर बैंक में बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने करीब 300 स्वयं सहायता समूहों के खाते खुलवाने में सहयोग किया तथा लगभग 200 स्वयं सहायता समूहों को सीसीएल ऋण दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले वर्ष तक उनके माध्यम से लगभग 8 करोड़ रुपए का ऋण समूहों को दिलाया जा चुका था, जबकि इस वर्ष अब तक करीब 1 करोड़ रुपए का ऋण कराया जा चुका है।
कियोस्क के माध्यम से घर-घर बैंकिंग सुविधा
कृष्णा को बैंक की ओर से कियोस्क आईडी भी प्रदान की गई है। इसके माध्यम से वे ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ लोगों को घर-घर जाकर बैंकिंग और पैसे के लेन-देन की सुविधा देती हैं। वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य योजनाओं की राशि प्राप्त करने वाले लोगों को भी पैसे निकालने में सहयोग करती हैं।
उन्होंने अपने पति को भी ऑनलाइन कार्य से जोड़ा और उनके लिए ऑनलाइन शॉप शुरू करवाई है।
साइकिल से स्कूटी और अब फोर व्हीलर तक का सफर
कृष्णा बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। एक समय ऐसा था जब उनके पास साइकिल तक नहीं थी, लेकिन आज उनके पास स्कूटी है। उन्होंने अपना स्वयं का मकान बनाया है। वर्तमान में उनकी मासिक आमदनी करीब 45 हजार रुपए है। हाल ही में उन्होंने फोर व्हीलर भी खरीदी है और स्वयं उसे चलाना सीख चुकी हैं।
कृष्णा कपासिया आज स्वयं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अब उनका प्रयास है कि उनके साथ जुड़ी अन्य महिलाओं को भी ऋण और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए और अधिक से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
योजनाओं से जुड़कर बदल रही महिलाओं की जिंदगी
कृष्णा कपासिया का कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से जुड़कर उनके जैसी ग्रामीण और गरीब महिलाएं भी आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। उन्होंने अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रति आभार व्यक्त किया है।




